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Chandra Shekhar Azad

चंद्रशेखर का आजाद जीवन

Chandra Shekhar Azad Story in Hindi
   Chandra Shekhar Azad

Chandra Shekhar Azad Life Story in Hindi

आजादी पाने के लिए देश की बलिवेदी पर अनगिनत क्रांतिकारी बलिदान हो गए । उनमें से एक प्रमुख क्रांतिकारी Chandra Shekhar Azad थे । उनका जन्म २३ जुलाई, १९०६ को मध्यप्रदेश के भाँवर में हुआ था ।

चंद्रशेखर कट्टर सनातन धर्मी ब्राहाण परिवार में पैदा हुए थे । इनके पिता नेक और धर्मनिष्ठ थे और उनमें अपने पांडित्य का कोई अहंकार नहीं था । वे बहुत स्वाभिमानी और दयालु प्रवृति के थे । घोर गरीबी में उन्होंने दिन बितायें थे और इसी कारण चंद्रशेखर की अच्छी शिक्षा नहीं हो पाई, लेकिन पढ़ना – लिखना उन्होंने गाँव के ही एक बुजुर्ग श्री मनोहरलाल त्रिवेदी से सिख लिया था, जो उन्हें घर पर निशुल्क पढ़ाते थे ।

बचपन से ही Chandra Shekhar Azad में भारतमाता को स्वतंत्र कराने की भावना कूट – कूटकर भरी हुई थी । इसी कारण उन्होंने स्वयं अपना नाम आजाद रख लिया था । उनके जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना ने उन्हें सदा के लिए क्रांति के पथ पर अग्रसर कर दिया । १३ अप्रैल, १९१९ को जलियांवाला बाग़ अमृतसर में जनरल डायर ने जो नरसंहार किया, उसके विरोध में तथा रौलट एक्ट के विरुद्ध जो जन – आंदोलन प्रारंभ हुआ था, वह दिन – प्रतिदिन और जोर पकड़ता जा रहा था ।

इसी आंदोलन के दौरान प्रिंस ऑफ़ वेल्स मुम्बई आए और वे जहाँ – जहाँ गए, वहां – वहां भारतीयों ने उनका बहिष्कार किया । जब राजकुमार बनारस पहुँचने वाले थे, उस समय वहां भी उनके बहिष्कार का जुलूस में युवा चंद्रशेखर अपने साथीयों के साथ शामिल थे । पुलिस वाले जुलूस को तितर – बितर करने के लिए लाठी घुमाते हुए आ रहे थे । यह देख Chandra Shekhar Azad के मित्रगण लाठी के प्रहार से बचने के लिए इधर – उधर फ़ैल गए । केवल चंद्रशेखर ही अपने स्थान पर निडर खड़े रहे ।

इसी बीच कुछ आंदोलनकर्ता, जो एक विदेशी कपड़ें की दुकान पर धरना दे रहे थे, उन पर पुलिस का एक दारोगा डंडे बरसाने लगा । यह अत्याचार Chandra Shekhar Azad से देखा नहीं गया और उन्होंने पास पड़ा एक पत्थर उठाकर उस दारोगा के माथे पर दे मारा । निशान अचूक था । दारोगा घायल होकर वहीँ जमीन पर गिर गया, लेकिन चंद्रशेखर को ऐसा करते हुए एक सिपाही ने देख लिया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन इस गिरफ्तारी से चंद्रशेखर जरा भी भयभीत या विचलित नहीं हुए । उनकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस वालोँ ने उनके कमरे की तलाशी ली तो उनके कमरे में लोकमान्य तिलक, लाला लाजपत राय, महात्मा गांधी समेत अनेक राष्ट्रीय नेताओँ के चित्र मिले, जिसके आधार पर पुलिस वालोँ ने उन पर राष्ट्रद्रोह का आरोप लगा दिया ।

इसके बाद उन्हें थाने में ले जाकर हवालात में बंद कर दिया गया । दिसंबर की कड़ाके वाली ठंड की रात थी और ऐसे में Chandra Shekhar Azad को ओढ़ने – बिछाने के लिए कोई बिस्तर नहीं दिया गया क्योंकि पुलिस वालोँ का ऐसा सोचना था कि यह लड़का ठंड से घबरा जाएगा और माफी माँग लेगा, किंतु ऐसा नहीं हुआ । यह देखने के लिए लड़का क्या कर रहा है और शायद वह ठंड से ठिठुर रहा होगा, आधी रात को इंसपेक्टर ने चंद्रशेखर की कोठरी का ताला खोला तो वह यह देखकर आश्चर्यचकित हो गया कि चंद्रशेखर दंड – बैठक लगा रहे थे और उस कड़कड़ाती ठंड में भी पसीने से नहा रहे थे ।

दूसरे दिन Chandra Shekhar Azad को न्यायालय में मजिस्ट्रेट के सामने ले जाया गया । उन दिनों बनारस में एक बहुत कठोर मजिस्ट्रेट नियुक्त था । उसी अंग्रेज मजिस्ट्रेट के सामने १५ वर्षीय चंद्रशेखर को पुलिस ने पेश किया ।

मजिस्ट्रेट ने बालक से पूछाः “तुम्हारा नाम ?” बालक ने निर्भयता से उत्तर दिया – “Azad” । “पिता का नाम ?” – मजिस्ट्रेट ने कड़े स्वर में पूछाः । ऊँची गरदन किए हुए बालक ने तुरंत उत्तर दिया – “स्वाधीन” । युवक की हेकड़ी देखकर न्यायाधीश क्रोध से भर उठा । उसने फिर पूछाः – “तुम्हारा घर कहाँ है ?” चंद्रशेखर ने गर्व से उत्तर दिया – “जेल की कोठरी” । न्यायाधीश ने क्रोध में चंद्रशेखर को १५ बेंत (कोड़े) लगाने की सजा दी ।

बेंत (कोड़े) लगाने के लिए चंद्रशेखर को जेलखाने में ले जाया गया । बनारस का जेलर बड़े ही क्रूर स्वभाव का व्यक्ति था । कैदियों को सजा देने में उसे बड़ा आनंद आता था । इसलिए बेंत (कोड़े) लगवाने का कार्य उसे ही सौंपा गया । कोड़े लगवाने के लिए उसने Chandra Shekhar Azad को एक तख्ते से बंधवा दिया । इस समय उनके शरीर पर एक लंगोट के सिवाय अन्य कोई वस्त्र नहीं था । बेंत (कोड़े) लगाने वाले जल्लाद को कोड़े लगाने का आदेश दिया और फिर चंद्रशेखर पर तडातड़ बेंत (कोड़े) पड़ने लगे ।

लेकिन चंद्रशेखर भी अपनी हिम्मत के पक्के थे । उनकी हिम्मत व सहनशीलता ने बनारस के उस निर्दयी जेलर को भी हिला दिया । शरीर पर जबरदस्त पड़ने वाली बेंतों (कोड़े) की मार भी चंद्रशेखर के होंठों की मुस्कराहट और चेहरे पर चमचमाते देशभक्ति के तेज को न छीन सकी । हर बेंत (कोड़े) पर वह ‘भारतमाता की जय’ और ‘वंदेमातरम्’ का नारा लगाते रहे । यह सब देखकर वह जेलर झुंझला उठा और बोला – “किस मिट्टी का बना है यह लड़का ?” पास खड़े जेल के अन्य अफसर और उपस्थित लोग भी चंद्रशेखर की इस सहनशक्ति को बहुत आश्चर्य के साथ देखते रहे ।

१५ बेंतों ( कोड़े ) की सजा के पश्चात, जेल के नियमानुसार तीन आने पैसे, जेलर ने चंद्रशेखर को दिए, लेकिन Chandra Shekhar Azad ने वह पैसे लेकर जेलर के मुँह पर ही फेंक दिए । घावों पर जेल के डोक्टर ने दवा लगा दी, फिर भी खून बहना बंद नहीं हुआ । वह किसी तरह पैदल ही घिसटते हुए जेल से बाहर निकले, लेकिन अब तक चंद्रशेखर की वीरता की कहानी बनारस के घर – घर में पहुँच गयी थी और जेल के दरवाजे पर शहर की जनता फूल – मालाएँ लेकर उनका स्वागत करने के लिए पहुँच चुकी थी । सबने मालाएँ पहनाकर उनका स्वागत किया और उन्हें अपने कंधों पर उठा लिया । इसके साथ ही इन नारों से आकाश गूंज उठा – ‘चंद्रशेखर आजाद की जय, भारतमाता की जय’ ।

इस तरह १५ बेंतों (कोड़े) की सजा ने किशोर अवस्था में ही Chandra Shekhar Azad को एक लोकप्रिय नेता के रूप में प्रसिद्ध कर दिया । चंद्रशेखर को मिलने वाली सजा दर्दनाक व क्रूर अवश्य थी, लेकिन इस घटना के बाद उनकी भारतमाता के प्रति श्रद्धा और बलवती हुई, क्रांति की चिनगारियाँ उनके मन में धीरे – धीरे आग के रूप में परिवर्तित होने लगीं । आजादी का परवान उनके सिर पर चढ़ गया और अब उनके जीवन में केवल एक ही संकल्प शेष रह गया और वह था – देश जो अंग्रेजो की गुलामी से आजाद कराना ।

पंद्रह वर्ष की उम्र में घटी यह घटना उनके जीवन का वह महत्वपूर्ण अध्याय थी जिसके कारण वह चंद्रशेखर तिवारी से चंद्रशेखर आजाद बने और क्रांतिकारीयों की श्रेणियों में गिने जाने लगे । कम उम्र में ही Chandra Shekhar Azad अनेकानेक युवाओं तथा भगत सिंह, सुखदेव जैसे क्रांतिकारीयों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बने और अपने जीवन की आहुति देकर देश की स्वाधीनता का संकल्प पूर्ण कर गए ।

हम Aasaan Hai की और से भारत के इस महान क्रांतिवीर Chandra Shekhar Azad को सत सत नमन करते है ।
Chandra Shekhar Azad अमर रहो.

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Source : अखिल विश्व गायत्री परिवार

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VIRAT CHAUDHARY

हेल्लो फ्रेंड्स, मैं विराट आसान है का संस्थापक और मोटिवेशनल लेखक, ब्लॉगर और इंटरप्रेन्योर हूँ. मैं यहाँ अपने लाइफ एक्सपीरियंस शेयर करता हूँ और बताता हूँ की कैसे हम अपनी लाइफ आसान और सक्सेसफुल बनाये, कैसे अपने मनचाहे लक्ष्य प्राप्त करे और कैसे एक विराट सफलता हासिल करे. यहाँ मैं रेगुलर प्रेरणादायक, आत्मविश्लेषण और आत्मविकास के अत्यधिक प्रभावशाली लेख प्रस्तुत करता हूँ जिसे पढ़कर बेशक आप सब की लाइफ आसान और सफल होगी. Love You All. :)

This Post Has 17 Comments

  1. Chandrashekhar

    Ye Bhagatsinh ki pic hai….
    Ha ha ha…

  2. avinash kumar

    Thanks

  3. avinash kumar

    Hey this blog is very useful for us instead u posted
    Thank you

  4. avinash kumar

    Hey this blog is very useful for us but u forgot to post the photo of chandrasheker instead u posted a photo of bhagatsingh. Thank you

  5. satyendra.kr.tiwary

    : बहुत प्रेरणादायक कहानी है, ये महान वीरता क्रान्तिकारी की कहानी को सत्त सत्त नमन करता हूँ ।धरती माँ के ये क्रान्तिविर लाल सदा अमर रहे।

  6. Ravi E

    Story is very very motivation

  7. Vikas Sarkale

    Hey This Blog is very useful for us but you forgot to post the photo of Chandrashekher instead you posted a photo of Bhagatsing . Thank you

    1. VIRAT CHAUDHARY

      Hey Vikas,
      Glad, You Liked Our Blog and This Photo Match With Bhagat Singh but It is Chandra Shekhar Azad.

  8. anonyms

    look at the photo

  9. deepa

    Sabse pyaare aur ache leader the hamare Chandra shekhar ji. Apne bahut acha likha hai..

  10. JeevanDarpan.Com

    बहुत प्रेरणादायक तथा उर्जा देने बाली कहानी है.

    Visit हिंदी ब्लॉग > http://jeevandarpan.com हिंदी जगत में एक अद्भुत ब्लॉग.

    धन्यबाद !
    प्रकाश कुमार निराला.

    1. VIRAT CHAUDHARY

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका 🙂

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