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प्रसन्न रहने की कला | The art of being happy

प्राचीनकाल में एक संत थे । धर्मश्रधा के कारण सदा प्रसन्न रहते, चहेरे से उल्लास टपकता रहता । चोरों ने समझा उनके पास कोई बड़ी दौलत है, अन्यथा हर घडी इतने प्रसन्न रहने का और क्या कारण हो सकता है ? अवसर पाकर चोंरो ने उनका अपहरण कर लिया, जंगल में ले गए और बोले , हमने सुना है की आपके पास सुखदा मणि है, ईसी से इतने प्रसन्न रहते है, उसे हमारे हवाले कीजिये, अन्यथा जान की खैर नहीं । संत ने एक-एक करके हर चोर को अलग-अलग बुलाया और कहा, “चोरों के डर से मैंने उसे जमीं में गाड़ दिया है

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Swami vivekananda

स्वामी विवेकानंद (भागो मत) | Swami Vivekananda Moral Story

स्वामी रामकृष्ण परमहंस के शरीर-त्याग के बाद उनके शिष्य स्वामी विवेकानंद तीर्थयात्रा के लिए निकले । कई के दर्शन करते हुए वह कशी आये और विश्वनाथ के मंदिर में पहुंचे । अच्छी तरह से दर्शन करके बहार आये तो देखते है की कुछ बन्दर इधर-से-उधर चक्कर लगा रहे हैं । स्वामीजी जैसे ही आगे बढ़े की बंदर उनके पीछे पड गए । उन दिनों स्वामीजी लम्बा अंगरखा पहना करते थे और सर पर साफा बंधते थे । विधा प्रेमी होने के कारण उनकी जेबें पुस्तकों तथा कागजों से भरी रहती थीं । बंदरो को भ्रम हुआ की उनकी जेंबो में खाने की चीजे है ।

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परिश्रम ही धन है | Short Hindi Story

परिश्रम ही सच्चा धन है । सुन्दरपुर गावं में एक किशन रहेता था । उसके चार बेटे थे । वे सभी आलसी और निक्कमे थे । जब किशन बुढा हुआ तो उसे बेटो की चिंता सताने लगी । तुम लोग उसे निकल लेना ।” इतना कहते - कहते किशान के प्राण निकल गए । पिता का क्रिया-क्रम करने के बाद चारो भाइयो ने खेत की खुदाई शुरू कर दी । उन्होंने खेत का चप्पा-चप्पा खोद डाला, पर उन्हें कही धन नहीं मिला । एक बार किशान बहोत बीमार पड़ा । मृत्यु निकट देखकर उसने चार बेटो को अपने पास बुलाया । उसने उस चारो को कहा “ मैने बहुत सा धन अपने खेत में गाड रखा है ।

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जॉर्ज ईस्टमैन ‘कोडक’ कम्पनी के संस्थापक

लगन और मेहनत उसे सफलता की दिशा में अग्रसर करती ले गई। उसने इस दिशा में प्रवीणता प्राप्त की और विश्व विख्यात ‘कोडक’ कम्पनी का संस्थापक बना। उस कार्य में अकेला होने के कारण लाभ भी अच्छा कमा सका।

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लोभ का फंदा | Moral Story in Hindi

एक धनी व्यक्ति दिन-रात अपने व्यापारिक कामों में लगा रहता था। उसे अपने स्त्री-बच्चों से बात करने तक की फुरसत नहीं मिलती थी। पड़ोस में ही एक मजदूर रहता था जो एक रुपया रोज कमाकर लाता और उसी से चैन की वंशी बजाता।

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